मन में प्रश्न रखकर प्रभु श्रीराम का ध्यान करें और 15×15 शलाका सारणी के किसी भी अक्षर को स्पर्श करें। श्रीरामचरितमानस की पावन चौपाइयों से भक्तिपूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त करें।
श्री राम शलाका प्रश्नावली श्रीरामचरितमानस की चयनित चौपाइयों पर आधारित पारंपरिक भक्तिपूर्ण प्रश्नावली है। इसमें 15 × 15 = 225 खाने होते हैं। प्रत्येक खाने में एक अक्षर या अक्षर-खंड दिया रहता है।
किसी एक खाने को श्रद्धापूर्वक चुनने के बाद उसी स्थान से हर 9वाँ खाना (N → N+9 → N+18...) पढ़ा जाता है। इस प्रकार प्राप्त 25 अक्षर-खंडों से श्रीरामचरितमानस की 9 उत्तर-पंक्तियों में से एक बनती है।
चूँकि 225 को 9 से विभाजित करने पर 25 पूरे चक्र मिलते हैं (225 = 9 × 25), चुने हुए किसी भी cell number को 9 से भाग देने पर प्राप्त शेषफल से उत्तर तुरंत जाना जा सकता है:
| शेषफल (mod 9) | उत्तर क्रमांक | प्रारंभिक शब्द | फल (संकेत) |
|---|---|---|---|
| 1 | उत्तर 1 | सुनु सिय सत्य असीस हमारी | प्रश्न उत्तम है; कार्य सिद्ध होगा। |
| 2 | उत्तर 2 | प्रबिसि नगर कीजे सब काजा | श्रीराम का स्मरण करके कार्य आरम्भ करें; सफलता मिलेगी। |
| 3 | उत्तर 3 | उघरहिं अंत न होइ निबाहू | कार्य में भलाई नहीं; सफलता में संदेह है। |
| 4 | उत्तर 4 | बिधि बस सुजन कुसंगत परहीं | कुसंगति से बचें; कार्य पूर्ण होने में संदेह है। |
| 5 | उत्तर 5 | होइहि सोइ जो राम रचि राखा | परिणाम भगवान् पर छोड़ना उचित; कार्य होने में संदेह है। |
| 6 | उत्तर 6 | मुद मंगलमय संत समाजू | प्रश्न उत्तम है; कार्य सिद्ध होगा। |
| 7 | उत्तर 7 | गरल सुधा रिपु करहिं मिताई | प्रश्न बहुत श्रेष्ठ है; कार्य सफल होगा। |
| 8 | उत्तर 8 | बरुन कुबेर सुरेस समीरा | कार्य पूर्ण होने में संदेह है। |
| 0 | उत्तर 9 | सुफल मनोरथ होहुँ तुम्हारे | प्रश्न बहुत उत्तम है; मनोरथ/कार्य सिद्ध होगा। |
सुनु सिय सत्य असीस हमारी। पूजिहि मन कामना तुम्हारी॥
प्रश्न उत्तम है; कार्य सिद्ध होगा।
प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥
श्रीराम का स्मरण करके कार्य आरम्भ करें; सफलता मिलेगी।
उघरहिं अंत न होइ निबाहू। कालनेमि जिमि रावन राहू॥
कार्य में भलाई नहीं; सफलता में संदेह है।
बिधि बस सुजन कुसंगत परहीं। फनि मनि सम निज गुन अनुसरहीं॥
कुसंगति से बचें; कार्य पूर्ण होने में संदेह है।
होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥
परिणाम भगवान् पर छोड़ना उचित; कार्य होने में संदेह है।
मुद मंगलमय संत समाजू। जो जग जंगम तीरथराजू॥
प्रश्न उत्तम है; कार्य सिद्ध होगा।
गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई॥
प्रश्न बहुत श्रेष्ठ है; कार्य सफल होगा।
बरुन कुबेर सुरेस समीरा। रन सन्मुख धरि काहुँ न धीरा॥
कार्य पूर्ण होने में संदेह है।
सुफल मनोरथ होहुँ तुम्हारे। रामु लखनु सुनि भए सुखारे॥
प्रश्न बहुत उत्तम है; मनोरथ/कार्य सिद्ध होगा।
राम शलाका के 9 उत्तर वास्तव में 8 पूर्ण चौपाइयों से आते हैं (सुन्दरकाण्ड की एक चौपाई के दोनों अर्धांश उत्तर 2 और 7 बनाते हैं):
सुनु सिय सत्य असीस हमारी। पूजिहि मन कामना तुम्हारी॥ नारद बचन सदा सुचि साचा। सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा॥
बालकाण्ड में माता सीता के गौरी पूजन के समय माता पार्वती का आशीर्वाद।
प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥ गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई॥
सुन्दरकाण्ड में हनुमानजी के लंका प्रवेश के समय लंकिनी का आशीष। इस चौपाई के दोनों अर्धांश उत्तर 2 और 7 बनाते हैं।
लखि सुबेष जग बंचक जेऊ। बेष प्रताप पूजिअहिं तेऊ॥ उघरहिं अंत न होइ निबाहू। कालनेमि जिमि रावन राहू॥
बालकाण्ड के आरम्भ में कपट और दंभ के अनिष्टकारी परिणाम का वर्णन।
सठ सुधरहिं सतसंगति पाई। पारस परस कुधात सुहाई॥ बिधि बस सुजन कुसंगत परहीं। फनि मनि सम निज गुन अनुसरहीं॥
बालकाण्ड में सत्संगति की महिमा एवं कुसंगति से बचने का मार्गदर्शन।
होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥ अस कहि लगे जपन हरिनामा। गईं सती जहँ प्रभु सुखधामा॥
बालकाण्ड में शिव-सती प्रसंग में ईश्वर-इच्छा पर समर्पण का उपदेश।
मुद मंगलमय संत समाजू। जो जग जंगम तीरथराजू॥ राम भक्ति जहँ सुरसरि धारा। सरसइ ब्रह्म बिचार प्रचारा॥
बालकाण्ड में संत-समाज रूपी तीर्थराज प्रयाग की महिमा।
बरुन कुबेर सुरेस समीरा। रन सन्मुख धरि काहुँ न धीरा॥ भुजबल जितेहु काल जम साईं। आजु परेहु अनाथ की नाईं॥
लंकाकाण्ड में रावण वध के पश्चात मंदोदरी का विलाप व अहंकार के अंत की चेतावनी।
सुमन पाइ मुनि पूजा कीन्ही। पुनि असीस दुहु भाइन्ह दीन्ही॥ सुफल मनोरथ होहुँ तुम्हारे। रामु लखनु सुनि भए सुखारे॥
बालकाण्ड में पुष्पवाटिका से पुष्प लाने पर गुरु विश्वामित्र का मंगल आशीर्वाद।